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विश्व धार्मिक शांति संसदप्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय संस्था

अनुच्छेद 4 – 8

विविधता को मानवता को सशक्त बनाना चाहिए, विभाजित नहीं।

एक ऐसे विश्व का निर्माण करना जहाँ धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता मानवता को सुदृढ़ करे तथा सभी आस्थाओं और पृष्ठभूमियों के लोग शांति, परस्पर सम्मान और गरिमा के साथ मिलकर रह सकें।

ध्येय

संसद का ध्येय है सभी पक्षों को एक मंच पर लाना, शिक्षा प्रदान करना और सेवा करना।

  • शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देना
  • अंतरधार्मिक और अंतरसांस्कृतिक संवाद को प्रोत्साहित करना
  • प्रभावशाली धार्मिक नेताओं को एक मंच पर लाएँ
  • मानवीय सहायता संबंधी सहयोग को समर्थन दें
  • धार्मिक सहिष्णुता को सुदृढ़ करें
  • धार्मिक घृणा की रोकथाम
  • शांति शिक्षा को प्रोत्साहित करें
  • सांप्रदायिक तनाव के दौरान संवाद को समर्थन दें
  • धर्म और शांति पर अनुसंधान को आगे बढ़ाएँ
  • शांति के लिए कार्यरत युवा नेतृत्वकर्ताओं को सशक्त बनाना
  • शांति निर्माण में महिलाओं की भूमिका को सुदृढ़ करें
  • मानवता के हित में सहयोग के लिए संस्थाओं को प्रोत्साहित करना

मूलभूत सिद्धांत

  • शांति
  • मानवीय गरिमा
  • पारस्परिक सम्मान
  • धर्म एवं आस्था की स्वतंत्रता
  • अहिंसा
  • धार्मिक स्वतंत्रता
  • राजनीतिक तटस्थता
  • संस्थागत पारदर्शिता
  • धार्मिक समुदायों के बीच समानता
  • राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान
  • मानवीय दायित्व
  • टकराव से पहले संवाद
  • पूर्वाग्रह से पहले शिक्षा
  • धर्मसिद्धांतों पर सहमति की बाध्यता के बिना सहयोग

व्यवहार में तटस्थता

अनुच्छेद 7

धार्मिक तटस्थता

जनसंख्या, वित्तीय योगदान, राजनीतिक प्रभाव या ऐतिहासिक प्रतिष्ठा के आधार पर किसी धार्मिक परंपरा का संसद पर नियंत्रण नहीं है। प्रत्येक मान्यताप्राप्त समुदाय के साथ गरिमापूर्ण व्यवहार किया जाता है।

अनुच्छेद 8

राजनीतिक तटस्थता

संसद शांति के उद्देश्यों के लिए सरकारों, मंत्रालयों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ संवाद एवं सहयोग करती है, किंतु राजनीतिक दलों और चुनावी अभियानों से स्वतंत्र रहती है।

अनुच्छेद 46

संस्थागत स्वतंत्रता

संसद पर किसी संस्थापक, सदस्य, सरकार, दानदाता, धार्मिक संस्था या कंपनी का स्वामित्व नहीं है। यह अपने ध्येय के प्रति समर्पित है और अपने संविधान के अधीन कार्य करती है।

भाषाएँ और संसद का सभाकक्ष

आधिकारिक भाषाएँ

प्रारंभिक अंतरराष्ट्रीय चरण में अंग्रेज़ी, इतालवी और अरबी। इसके बाद फ़्रांसीसी, स्पेनी, चीनी, हिंदी, उर्दू, रूसी और पुर्तगाली को शामिल किया जाएगा, जिनके लिए पेशेवर तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता-सहायित मौखिक अनुवाद की सुविधा होगी।

संसद सभागार

एक वृत्ताकार या अर्धवृत्ताकार सभाकक्ष, जिसमें किसी धार्मिक समूह का आसन केंद्र में न हो और किसी एक प्रतीक का वर्चस्व न हो। केंद्र में: शांति · गरिमा · मानवता.